Woman Success Story: रसोई से निकल चुनी खेती-किसानी की राह, मेहनत से बदली घर-परिवार की तकदीर

आदित्य कृष्ण

अमेठी. जिनकी किस्मत साथ नहीं देती, अगर उनमें कुछ कर गुजरने की हिम्मत और लगन हो तो वो खुद अपनी किस्मत बदल देते हैं. उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के गौरीगंज विकासखंड के अरगवां गांव की रहने वाली मंजू देवी ऐसी ही एक महिला हैं. उन्होंने रसोई की राह छोड़कर खेती-किसानी की राह अपनाई और इसके जरिये वो अपने परिवार का आसानी से भरण-पोषण कर रही हैं. साथ ही एक बेहतर जिंदगी जी रही हैं. मुसीबतों से घिरी मंजू ने हार नहीं मानी, और अपनी मेहनत के जरिये सफलता के नये द्वार खोल दिये.

आज से 26 साल पहले मंजू की शादी हुई थी. उनके परिवार में पति दयाराम मौर्य, दो बेटे और एक बेटी हैं. मंजू की पारिवारिक स्थिति काफी दयनीय थी. इन्होंने इसे सुधारने का काफी प्रयास किया, लेकिन इसमें कामयाबी नहीं मिली. अंततः मंजू ने खुद से कुछ करने की ठानी और रसोई से निकल कर खेती-किसानी की राह चुनी.

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खेती-किसानी का काम शुरू किया

घर-परिवार की जिम्मेदारी संभालने के साथ मंजू देवी ने छोटे स्तर पर खेती-किसानी शुरू किया. आज वो देवी बड़े स्तर पर खेती-किसानी करती हैं. हैरान करने वाली बात है कि आज के आधुनिक समय में भी मंजू बैल से खेती करती हैं. खाद का उपयोग न करके, वो गोबर से खाद बनाकर उसे खेतों में डालती हैं, ताकि सब्जियों में किसी भी प्रकार का कोई नुकसान ना हो. मंजू देवी खेती-किसानी के साथ-साथ अपने परिवार का भी पूरा ध्यान रखती हैं.

खेतों में उगाती हैं मौसमी सब्जियां

मंजू मौसम के हिसाब से सब्जियां उगाती हैं. इनमें आलू, मटर, बैगन, मिर्च, टमाटर, मूली, गोभी के अलावा धनिया शामिल है. मौसम के हिसाब से जिस खेती का मौसम होता है वो उन सब्जियों को उगाती हैं. मंजू देवी खेती-किसानी के बाद शेष बचे समय में अपने परिवार का ध्यान रखती हैं. साथ ही वो मनरेगा में महिला मेट भी हैं. वो सखी समूह का भी काम करती हैं.

पहले थी काफी परेशानी, खेती-किसानी से सुधरे हालात

मंजू ने न्यूज़ 18 लोकल से बातचीत में बताया कि पहले जब वो केवल गृहणी थीं तो अनेक प्रकार की परेशानियां थी. मगर जब से उन्होंने खेती-किसानी का कार्य शुरू किया तब से उनके परिवार का खर्च चलता है. इससे वो अपने बच्चों की पढ़ाई का भी खर्च उठाती हैं. फसलों की सिचाई के लिए पानी की सुविधा उन्होंने अनुदान पर कराई है.

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