Shine City Scam High Court Unhappy With Slow Investigation – शाइन सिटी घोटाला : धीमी जांच से हाईकोर्ट नाखुश, कहा- लोग अब भी आरोपी के झांसे में आ रहे

इलाहाबाद हाईकोर्ट
– फोटो : अमर उजाला

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज समेत प्रदेश के कई शहरों में लोगों के साथ धोखाधड़ी कर लगभग 68 हजार करोड़ रुपये के शाइन सिटी घोटाले में केंद्र व राज्य सरकार की जांच एजेंसियों की धीमी जांच पर नाराजगी व्यक्त की है।  

कोर्ट ने कहा की जांच धीमी होने की वजह और कुछ नहीं, बल्कि आम नागरिकों का पैसे का लगा होना है। कोर्ट ने कहा, इस मामले में 2019 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी, परंतु आज तक मुख्य आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जा सका। यह टिप्पणी चीफ  जस्टिस राजेश बिंदल एवं जस्टिस जेजे मुनीर की खंडपीठ ने श्रीराम समेत कई अन्य इन्वेस्टर्स की तरफ  से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए की।

कोर्ट ने कहा कि एक तरफ  एजेंसियां सही दिशा में जांच करने का दावा कर रही हैं, दूसरी तरफ  आरोपी सोशल मीडिया पर अपना व्यवसाय बढ़ाने के लिए प्रचार-प्रसार कर रहा है। अब भी लोग आरोपी के झांसे में आकर गलतियां कर रहे हैं और जांच एजेंसियां कुछ नहीं कर पा रही हैं।

प्रदेश सरकार की तरफ से बताया गया कि आरोपियों की कई गाड़ियां सीज की गई हैं, उनके खिलाफ  कार्रवाई तेजी से की जा रही है। वहीं केंद्र सरकार की तरफ  से उपस्थित अधिवक्ता ने कुछ और समय दिए जाने की मांग की। जिससे, वह जांच की प्रगति के बारे में ठोस और विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट के सामने प्रस्तुत कर सकें। उन्होंने यह भी बताया केंद्र सरकार की एजेंसियां ब्रिटेन तथा यूएई सरकारों को इस संबंध में पत्र भी भेजा है। इस मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर को होगी। 

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज समेत प्रदेश के कई शहरों में लोगों के साथ धोखाधड़ी कर लगभग 68 हजार करोड़ रुपये के शाइन सिटी घोटाले में केंद्र व राज्य सरकार की जांच एजेंसियों की धीमी जांच पर नाराजगी व्यक्त की है।  

कोर्ट ने कहा की जांच धीमी होने की वजह और कुछ नहीं, बल्कि आम नागरिकों का पैसे का लगा होना है। कोर्ट ने कहा, इस मामले में 2019 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी, परंतु आज तक मुख्य आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जा सका। यह टिप्पणी चीफ  जस्टिस राजेश बिंदल एवं जस्टिस जेजे मुनीर की खंडपीठ ने श्रीराम समेत कई अन्य इन्वेस्टर्स की तरफ  से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए की।

कोर्ट ने कहा कि एक तरफ  एजेंसियां सही दिशा में जांच करने का दावा कर रही हैं, दूसरी तरफ  आरोपी सोशल मीडिया पर अपना व्यवसाय बढ़ाने के लिए प्रचार-प्रसार कर रहा है। अब भी लोग आरोपी के झांसे में आकर गलतियां कर रहे हैं और जांच एजेंसियां कुछ नहीं कर पा रही हैं।



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