Gyanvapi Masjid Case Hearing Of Swami Avimukteshwaranand Case Postponed Hearing Will Be Held On December 2 – Gyanvapi Masjid Case: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मामले की सुनवाई टली, कोर्ट ने अब दो दिसंबर की तारीख दी

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
– फोटो : अमर उजाला

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सिविल जज सीनियर डिविजन कुमुद लता त्रिपाठी की अदालत में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से दाखिल वाद की सुनवाई गुरुवार को भी पीठासीन अधिकारी के अवकाश पर रहने के कारण एक बार फिर टल गई। अब इस मामले में दो दिसम्बर को सुनवाई होगी। वादी के अधिवक्ता रमेश उपाध्याय के मुताबिक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से दाखिल इस वाद में ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग की आकृति की पूजा पाठ रागभोग आरती करने की अनुमति मांगी गई है।   
बता दें की शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य रहे और अब उनकी मृत्यु के बाद शंकराचार्य का पद सम्हाल रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद व रामसजीवन ने वरिष्ठ अधिवक्ता  अरुण कुमार त्रिपाठी,रमेश उपाध्याय  चंद्रशेखर सेठ के  माध्यम से अदालत में वाद दाखिल किया है जिसमे शृंगार गौरी प्रकरण में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के आदेश पर हुए कोर्ट कमीशन की कार्यवाही में मिले शिवलिंग की आकृति का विधिवत रागभोग,पूजन व आरती जिला प्रशासन की ओर से विधिवत करना चाहिए था,लेकिन अभी तक प्रशासन ने ऐसा नहीं किया है। न किसी अन्य सनातनी धर्म से जुड़े व्यक्ति को इसके लिए नियुक्त किया। उन्होंने बताया कि कानूनन देवता की  परस्थिति एक जीवित बच्चे के समान होती है। जिसे अन्न-जल आदि नहीं देना संविधान की धारा अनुच्छेद-21 के तहत दैहिक स्वतंत्रता के मूल अधिकार का उल्लंघन है।

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सिविल जज सीनियर डिविजन कुमुद लता त्रिपाठी की अदालत में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से दाखिल वाद की सुनवाई गुरुवार को भी पीठासीन अधिकारी के अवकाश पर रहने के कारण एक बार फिर टल गई। अब इस मामले में दो दिसम्बर को सुनवाई होगी। वादी के अधिवक्ता रमेश उपाध्याय के मुताबिक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से दाखिल इस वाद में ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग की आकृति की पूजा पाठ रागभोग आरती करने की अनुमति मांगी गई है।   

बता दें की शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य रहे और अब उनकी मृत्यु के बाद शंकराचार्य का पद सम्हाल रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद व रामसजीवन ने वरिष्ठ अधिवक्ता  अरुण कुमार त्रिपाठी,रमेश उपाध्याय  चंद्रशेखर सेठ के  माध्यम से अदालत में वाद दाखिल किया है जिसमे शृंगार गौरी प्रकरण में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के आदेश पर हुए कोर्ट कमीशन की कार्यवाही में मिले शिवलिंग की आकृति का विधिवत रागभोग,पूजन व आरती जिला प्रशासन की ओर से विधिवत करना चाहिए था,लेकिन अभी तक प्रशासन ने ऐसा नहीं किया है। न किसी अन्य सनातनी धर्म से जुड़े व्यक्ति को इसके लिए नियुक्त किया। उन्होंने बताया कि कानूनन देवता की  परस्थिति एक जीवित बच्चे के समान होती है। जिसे अन्न-जल आदि नहीं देना संविधान की धारा अनुच्छेद-21 के तहत दैहिक स्वतंत्रता के मूल अधिकार का उल्लंघन है।



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