‘बाल विवाह मुक्‍त भारत’ अभियान शुरू, नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी ने किया नेतृत्व

हाइलाइट्स

‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान की शुरुआत बनी मिसाल
नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी कर रहे नेतृत्व
26 राज्यों के 500 जिलों में करीब 10 हजार गांवों में शामिल हुए लोग

नई दिल्‍ली. नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी के नेतृत्व में ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान शुरु हुआ है. इसके तहत देशभर के 26 राज्यों में 500 से अधिक जिलों में करीब 10 हजार गावों की 70 हजार से अधिक महिलाओं और बच्चों की अगुआई में जागरुकता कार्यक्रम आयोजित कर दीया जलाया गया और कैंडिल मार्च निकाला गया. यह लड़कियों के बाल विवाह के खिलाफ देश ही नहीं बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा जागरुकता अभियान है. इसमें दो करोड़ से अधिक लोगों ने हिस्सेदारी कर और बाल विवाह को खत्म करने की शपथ लेकर इस अभियान को ऐतिहासिक बना दिया.

इस बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की खास बात यह थी कि सड़कों पर उतर कर नेतृत्व करने वाली महिलाओं में, ऐसी महिलाओं की संख्‍या ज्‍यादा थी जो कभी खुद बाल विवाह के दंश का शिकार हो चुकी थीं. कई जगह अभियान का नेतृत्व उन बेटियों ने किया, जिन्होंने समाज और परिवार से विद्रोह कर न केवल अपना बाल विवाह रुकवाया, बल्कि अपनी जैसी कई अन्य लड़कियों को भी बाल विवाह का शिकार होने से बचाया. संख्या और व्यापकता की दृष्टि से बाल विवाह के खिलाफ ग्रासरूट लेबल पर एक दिन में इतने बड़े पैमाने पर कार्यक्रम देश-दुनिया में पहली बार आयोजित हुआ है.

शहीद भगत सिंह के गांव में बाल विवाह रोकने की शपथ ली 

अभियान की विशालता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि यह उत्‍तर में दुनिया के सबसे ऊंचे स्‍थानों में से एक लद्दाख के ‘खारदुंग पास’ से लेकर कश्‍मीर की विश्‍व प्रसिद्ध डल झील और देश की राजधानी के ऐतिहासिक महत्‍व वाले स्‍थानों राजघाट, इंडिया गेट और कुतुबमीनार पर भी पहुंचा. वहीं, दक्षिण के छोर पर इस अभियान ने कन्‍याकुमारी के स्‍वामी विवेकानंद रॉक मेमोरियल और अंडमान निकोबार में भी दस्‍तक दी. इसके अलावा पूर्वोत्‍तर दिशा में मणिपुर, सुंदरबन, भारत-बांग्‍लादेश सीमा, विक्टोरिया मेमोरियल, पश्चिम में राजस्‍थान और पंजाब में जलियांवाला बाग व भगत सिंह के गांव में भी इस अभियान के तहत लोगों ने बाल विवाह रोकने की शपथ ली.

कश्‍मीर की विश्‍व प्रसिद्ध डल झील में भी चला अभियान.

बाल विवाह मानव अधिकारों और गरिमा का हनन: कैलाश सत्‍यार्थी 

देश के कोने-कोने और दूरदराज में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र, नौजवान, डॉक्टर, प्रोफेशनल्स, महिला नेत्री, वकील, शिक्षक, शिक्षाविद् और मानव अधिकार कार्यकर्ताओं ने भी जम कर हिस्सा लिया. अभियान में नागरिक संगठन और स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी बड़ी तादाद में हिस्सा लिया और जमीनी स्तर पर कार्यक्रम भी आयोजित किए. इस मौके पर कैलाश सत्‍यार्थी ने कहा, ‘बाल विवाह मानव अधिकारों और गरिमा का हनन है, जिसे दुर्भाग्य से सामाजिक स्वीकृति प्राप्त है. यह सामाजिक बुराई हमारे बच्चों, खासकर हमारी बेटियों के खिलाफ, अंतहीन अपराधों को जन्म देती है. कुछ सप्ताह पहले मैंने बाल विवाह मुक्त भारत बनाने का आह्वान किया था. इसने सदियों पुराने दमनकारी सामाजिक रिवाज से घुटन महसूस कर रही 70 हजार महिलाओं में वह आग पैदा कर दी कि वे इसे चुनौती देने के लिए सड़कों पर उतर आई हैं.

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बाल विवाह रोकने के लिए कई गांव और शहरों में लोगों ने शपथ ली.

इस कुप्रथा का अंत करना ही होगा: नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित लेमा जोबोई 

इस अवसर पर एक और नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित लाइबेरिया की लेमा जोबोई भी मौजूद थी. लेमा जेबोई ने भी बाल विवाह पर चिंता जताते हुए कहा, ‘बाल विवाह वैश्विक स्‍तर पर एक भयावह बुराई है. हमें मानवाधिकार की हत्‍या करने वाली इस कुप्रथा का अंत करना ही होगा.’ सत्यार्थी के दीया जलाते ही देश में रातभर लोगों ने कैंडिल मार्च आयोजित कर और दीया जला कर जनता को बाल विवाह के खिलाफ जागरुक किया. कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन (केएससीएफ) द्वारा संचालित बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत देशभर के 26 राज्यों में 500 से अधिक जिलों में करीब 10 हजार गावों (केएससीएफ द्वारा 6,015 गांवों में बाकी सरकार और अन्य संस्थाओं द्वारा) की 70,547 महिलाओं और बच्चों की अगुआई में जागरुकता कार्यक्रम आयोजित कर दीया जलाया गया और कैंडिल मार्च निकाला गया. इस ऐतिहासिक ‘बाल विवाह मुक्‍त भारत’ अभियान का कैलाश सत्‍यार्थी ने रविवार शाम को राजस्थान स्थित विराट नगर के बंजारा समुदाय की बहुलता वाले नवरंगपुरा गांव से एक विशाल जनसभा में दीप जलाकर कर शुभारंभ किया.

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