‘पीएम मोदी ने किया माटी का सम्मान’, झारखंड के डॉ. जानुम सिंह सोय को पद्म श्री पुरस्कार, भाषा संरक्षण व संवर्धन में अतुलनीय योगदान

हाइलाइट्स

झारखंड से डॉ. जानुम सिंह सोय को पद्म श्री सम्मान देने की घोषणा.
डॉ जानुम सिंह का शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान.
डॉ. सोय पिछले 4 दशक से ‘हो’ भाषा के संरक्षण व संवर्धन में जुटे हैं.

रांची. भारत सरकार ने 106 पद्म पुरस्कारों की घोषणा की है. सूची में 6 पद्म विभूषण, 9 पद्म भूषण और 91 पद्म श्री शामिल हैं. 19 पुरस्कार विजेता महिलाएं हैं. समाजवादी पार्टी के संरक्षक और यूपी के पूर्व सीएम दिवंगत मुलायम सिंह यादव को पद्म विभूषण (मरणोपरांत) से नवाजा गया है. बालकृष्ण दोसी और पश्चिम बंगाल के पूर्व डॉ दिलीप महलानाबीस को भी पद्म विभूषण (मरणोपरांत) से नवाजा गया है. डॉ दिलीप महलानाबीस को ओआरएस की खोज के लिए ये सम्मान दिया गया है. इनके अलावा संगीतकार जाकिर हुसैन, एसएम कृष्णा, श्रीनिवास वरधान को भी पद्म विभूषण से नवाजा जायेगा. झारखंड के डॉ जनम सिंह सोय को शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में पद्म श्री सम्मान देने की घोषणा की गयी है.

प्रो सोय पिछले चार दशक से हो भाषा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में जुटे हैं. उन्होंने हो जनजाति की संस्कृति पर कई पुस्तकें लिखी हैं. प्रो सोय कोल्हान यूनिवर्सिटी से रिटायर करने के बाद हो भाषा को पीजी के औपचारिक पाठ्यक्रम में शामिल करने में लगे रहे. 72 वर्षीय प्रे सोय की पुस्तकों में आधुनिक हो शिष्ट काव्य समेत छह पुस्तकें हैं.

प्रो सोय को पद्मश्री दिए जाने की घोषणा के साथ ही बधाइयों का तांता लग गया है. सीएम हेमंत सोरेन ने भी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बधाई व शुभकामनाएं दी हैं. प्रदेश के पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी ने कहा, भाषा के संरक्षण और संवर्द्धन में जुटे, हो जनजाति की संस्कृति व जीवनशैली पर कई पुस्तकें लिख चुके कोल्हान विश्वविद्यालय से सेवानिवृत प्रोफेसर डॉ. जानुम सिंह सोय पद्मश्री के लिए चयनित किए गए हैं. डॉ. सोय को यह सम्मान पूरे राज्यवासियों का सम्मान है।बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं.

आपके शहर से (रांची)

वहीं झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने भी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, कोल्हान विश्वविद्यालय(झारखंड) से सेवानिवृत्त प्रो जनम सिंह सोय को हो भाषा के लिए मिला पद्मश्री पुरस्कार मिलने पर उन्हें बहुत बधाई और शुभकामनाएं.प्रो सोय का पिछले चार दशक से हो भाषा के संवर्धन और उत्थान में उल्लेखनीय योगदान रहा है. उन्होंने छह पुस्तकें भी लिखीं हैं.

इसी क्रम में राज्य के पूर्व सीएम रघुवर दास ने कहा, झारखंड फिर हुआ गौरवान्वित! झारखंड के जनजातीय भाषा के विद्वान डॉ जनुम सिंह सोय को “हो” भाषा के संरक्षण और प्रचार के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया. आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का माटी से जुड़े लोगों को सम्मान देने के लिए आभार.

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