दिल्ली- NCR में बारिश के बाद अब Dengue का कहर, इस साल कितना खतरनाक है डेंगू का बुखार?

नई दिल्ली. दिल्ली-एनसीआर (Delhi- NCR) में पिछले कुछ दिनों से डेंगू के मामले (Dengue Cases) में तेजी आ गई है. दिल्ली में कोरोना संक्रमण (COVID-19) के केस कम होने शुरू हुए ही थे कि अब डेंगू ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है. दिल्ली नगर निगम (MCD) की ओर से जारी किए गए आकंड़ों के अनुसार अगस्त में जहां 75 मामले पाए गए थे, वहीं सितंबर का आंकड़ा 600 पार चला गया. अगर अक्टूबर की बात करें पिछले 10 दिनों में डेंगू के 300 मामले सामने आ चुके हैं. हालांकि, डेंगू से अब तक किसी की मौत नहीं हुई है. दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में डेंगू के मरीजों का आना लगातार जारी है.

पिछले कई सालों के बाद इस साल सितंबर और अक्टूबर में डेंगू के मामले बढ़े हैं. सिंतबर महीने में दिल्ली में डेंगू के 900 से अधिक मामले सामने आ चुके थे, जो कि पिछले चार साल में सबसे ज्यादा हैं. पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश होने से डेंगू के मामले में एकाएक तेजी आ गई है. दिल्ली में जलजमाव की समस्या काफी पुरानी है. थोड़ी सी बारिश में ही दिल्ली में जगह-जगह पानी भर जाता है. खासकर मॉनसून के वक्त दिल्लीवालों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. दिल्ली-एनसीआर में जुलाई से अक्टूबर के बीच जगह-जगह जलजमाव की समस्या के कारण डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी होने लगती है.

पिछले कई सालों के बाद इस साल सितंबर और अक्टूबर में डेंगू के मामले बढ़े हैं.

दिल्ली-एनसीआर में डेंगू ने तोड़े सारे रिकॉर्ड्स
गाजियाबाद के वैशाली में वन स्टेप क्लिनिक चलाने वाले डॉ अभिषेक कुमार न्यूज- 18 हिंदी के साथ बातचीत में कहते हैं, ‘डेंगू फीवर 3 तरह के होते हैं, जिसमें से दो बुखार बेहद खराब माने जाते हैं. तीन तरह के बुखार जैसे की क्लासिकल डेंगू फीवर, डेंगू हैमरेजिक फीवर (डीएचएफ), डेंगू शॉक सिंड्रोम (डीएसएस). इन तीनों में से सबसे ज्यादा खराब डीएचएफ और डीएसएस होता है. इन दो तरह के डेंगू से ग्रस्त मरीजों को अगर जल्द ही हॉस्पिटल में एडमिट नहीं कराया गया तो उसकी मौत हो सकती है. इस साल लोगों में डेंगू को लेकर काफी डर है. डेंगू से बचाव के लिए सबसे बेहतर तरीका है लोगों में जागरूकता और सतर्कता लाने की. डेंगू का मच्छर साफ पानी में पनपता है. इस बार डेंगू के मामले तो अधिक आ रहे हैं, लेकिन अच्छी बात यह है कि इस बार उतना गंभीर नहीं है. लगभग 80-90 प्रतिशत मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं पड़ रही है.

डेंगू कितना खतरनाक है इस बार
डॉ अभिषेक आगे कहते हैं, ‘इस बार यह अधिकतर मामलों में बुखार तक सीमित है. कुछ ही मरीजों को प्लेट्लेट्स देने की जरूरत पड़ रही है. पहले ब्लीडिंग का खतरा अधिक होता था, जो इस बार कम है. ब्लीडिंग मुंह, नाक, पेशाब के रास्ते के अलावा पेट और मस्तिष्क में होता है. बुखार उतरने के बाद प्लेट्लेट्स कम होने लगती है. इसलिए एक से दो दिन तक तेज बुखार होने पर एनएस-1 टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है. इससे डेंगू है या नहीं पता चल जाता है.’

covid-19 and dengue symptoms how to differentiate

कोविड-19 और डेंगू के लक्षणों में काफी समानता होती है.

हाल के वर्षों में डेंगू से मौत के ये हैं आंकड़ें
गैरतलब है कि हाल के वर्षों में डेंगू से सबसे ज्यादा 60 लोगों की मौत 2015 में हुई थी. पिछले कुछ सालों की बात करें तो 2017 में दिल्ली में डेंगू के 185, 2018 और 2019 में 40 मामले, 2020 में 31 मामले और 2021 में 52 मामले सामने आए थे. वहीं, इस साल अक्टूबर के पहले सप्ताह तक 1200 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं.

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एडीस मच्छर के काटने से डेंगू होता है. मच्छर के डंक मारने के बाद बीमारी के लक्षण 3, 4 दिन बाद दिखने लगते हैं. इससे अधिक समय भी लग सकता है. इसके बाद पूरे शरीर में दर्द होना शुरू हो जाता है. जुलाई से लेकर अक्टूबर के महीने के बीच इस बीमारी का खतरा अधिक रहता है. डॉक्टरों का कहना है कि एडीज मच्छर 3 फीट से ज्यादा ऊंचाई पर नहीं उड़ पाते हैं. जब किसी शख्स को एडीज मच्छर काटता है तो वह इंसान का खून चूसता है और खून में डेंगू का वायरस छोड़ देता है. अगर वही मच्छर दूसरे व्यक्ति को काटे तो वो भी डेंगू की चपेट में आ जाता है.

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