क्यों रावण के पिता ने दिया सबकुछ नष्ट होने का श्राप, दशानन ने भाई से कैसे हड़पी सोने की लंका

हाइलाइट्स

सोने की लंका रावण के नामी सौतेले भाई ने बनाई थी जिसे फिर दशानन के डर से भागना पड़ा
केवल लंका ही नहीं बल्कि उड़ने वाला पुष्पक विमान भी रावण को इसी भाई की कब्जा की गई संपत्ति से मिला
रावण के पिता एक बड़े ऋषि थे जो बेटे की हरकतों से नाराज रहा करते थे, उससे कर लिया था किनारा

विजयादशमी के पर्व पर देशभर में भगवान राम की रावण पर जीत की खुशियां मनाई जाती हैं. दशहरे के दिन राम ने रावण को मारकर युद्ध को जीत लिया था. रावण पराक्रमी राक्षस राजा था, जो विद्वान भी था और तप से उसने बहुत सी शक्तियां भी हासिल की हुईं थीं लेकिन उसने अपनी बुद्धि और शक्तियों का इस्तेमाल खराब कामों में किया. रावण के पिता एक बड़े ऋषि थे. उन्होंने दो शादियां कीं. लेकिन बचपन से ही वह रावण से कुपित रहते थे. इसी वजह से बाद में पिता ने उसे ऐसा श्राप दिया, जिससे उसका सबकुछ नष्ट हो गया. सोने की लंका भी रावण ने नहीं बल्कि उसके उस नामी भाई ने बनाई थी, जिसके ऐश्वर्य से देवता भी ईर्ष्या करते थे. कौन से लंकाधिपति के माता-पिता और परिवार के लोग.

सोने की लंका रावण के नामी सौतेले भाई ने बनाई थी. जब रावण ने लंका पर हमला किया तो ये भाई जान बचाकर वहां से भाग गया था. फिर यहां कभी नहीं लौट सका.

पौराणिक ग्रंथों के साथ रामचरित मानस, वाल्मिकी रामायण और अन्य किताबों में इसका जिक्र होता है. कुछ समय पहले प्रकाशित हुई अनंत नीलकंठन की किताब “असुर” में इसका विस्तार से वर्णन है कि किस तरह रावण ने ऐश्वर्य नगरी कही जाने वाली स्वर्णिम लंका पर हमला करके उसे जीत लिया. फिर वह लंबे समय तक यहां राज करता रहा.

क्या था रावण के सौतेले भाई का नाम
रावण के इस भाई का नाम कुबेर था. जी हां, वही कुबेर जो धन के देवता कहे जाते हैं. कुबेर रावण का सौतेला भाई था. वह धनपति था. कुबेर ने लंका पर राज कर ना केवल उसका विस्तार किया था बल्कि उसे सोने की नगरी में बदल दिया था. जिससे लंका के वैभव की चर्चा हर ओर होने लगी.

कौन थे रावण के पिता 
रावण के पिता जाने-माने ऋषि थे. उनका नाम विश्रवा था. उनकी दो पत्नियां थीं. पहली पत्नी इलबिड़ा के गर्भ से कुबेर पैदा हुए जबकि दूसरी पत्नी कैकसी से रावण, कुंभकर्ण, विभीषण और शूर्पणखा का जन्म हुआ. ऋषि विश्रवा की दूसरी पत्नी कैकसी राक्षस कुल से थीं.

रावण का सौतेला भाई कुबेर, जिसे हिंदू धर्म ग्रंथों में धन का देवता कहा जाता है

कुबेर के अपमान से आहत था रावण
अनंत नीलकंठन की किताब “असुर” कहती है, जहां एक ओर कुबेर ऐश्वर्य और धनदौलत का स्वामी था और श्रीलंका का राजा था. वहीं रावण और उसके अन्य भाई-बहन बहुत दरिद्रता के शिकार थे.  उन्हें अभावों का जीवन जीना पड़ता था. कुबेर का व्यवहार भी रावण और उसके भाई-बहनों के प्रति अच्छा नहीं था. ना ही उसने कभी उनकी कोई मदद ही की. कुबेर के अपमानजनक व्यवहार से युवा रावण आहत रहता था.

रावण ने खुद को मजबूत किया और छीन ली लंका
इसके बाद रावण ने तप किया. कई तरह की शक्तियां हासिल कीं. उसने खुद को बहुत मजबूत बना लिया. बाद में हालात ऐसे बने कि रावण ने हमला करके कुबेर से सोने की नगरी लंका छीन ली. कुबेर को वहां से भागना पड़ा. कुबेर को हिंदू पौराणिक ग्रंथों में ना केवल धनपति और धन का देवता माना जाता है बल्कि वह यक्षों के राजा भी हैं.

सबसे पहले तीन राक्षसों ने बसाई थी ये नगरी
पुराण ये कहते हैं कि कुबेर से भी पहले माली, सुमाली और माल्यवान नाम के तीन राक्षसों ने त्रिकुट सुबेल यानि सुमेरु पर्वत पर लंकापुरी बसाई थी. फिर माली को मारकर देवों और यक्षों ने कुबेर को लंकापति बना दिया था.

एक प्राचीन चित्र में रावण का सोने से बना हुआ किला, जहां हमेशा राक्षसों का कड़ा प्रहरा होता था

रावण की मां कैकसी इन्हीं तीन राक्षसों में एक सुमाली की बेटी थीं. नाना सुमाली के उकसाने पर रावण ने सौतेले भाई कुबेर से युद्ध की ठानी.

रावण के हमले में भागना पड़ा था कुबेर को
रावण ने पहले तो तप किया और फिर जंगलों में रहते हुए एक मजबूत सेना तैयार कर ली. रावण ने जब सेना के साथ कुबेर की वैभवशाली नगरी पर हमला किया तो ये हमला इतना तीव्र था कि कुबेर और उसकी सेना संभल भी नहीं सकीय उसे वहां से परिवार के साथ जान बचाकर भागना पड़ा.

कुबेर वहां से भाग गया. वहां से वो अलका पर्वत जाकर रहने लगा. इसके बाद रावण ने उसकी सारी संपत्ति और लंका को हथिया लिया. हालांकि ये भी कहा है कि पिता विश्रवा के कहने पर कुबेर ने खुद ही लंका रावण को दे दी थी. इसी दौरान रावण ने कुबेर के पुष्पक विमान भी हथिया लिया, जिसका उसने भरपूर इस्तेमाल किया. सीता का हरण करने के लिए भी रावण इसी विमान से जंगल में गया था. बाद में जब श्रीराम ने रावण पर जीत हासिल की तो वो इसी विमान से अयोध्या लौटे थे.

क्या रावण के पिता ने ही दिया था उसके नष्ट होने का श्राप
हालांकि अनंत नीलकंठन की किताब असुर और रामानंद सागर के टीवी सीरियल रामायण के अनुसार रावण के पिता विश्रवा उसकी हरकतों से नाराज रहते थे. उन्होंने उसे श्राप भी दिया था कि एक दिन ये लंका उसके हाथ से निकल जाएगी. उसे हार का मुंह ही नहीं देखना पड़ेगा बल्कि मृत्यु का सामना भी करना होगा. बाद में यही हुआ भी.

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