क्या बीजेपी के सत्ता में आने के बाद पूर्वोत्तर के राज्य मुख्यधारा में आए, जानिए गृह मंत्री अमित शाह के बातों में कितना है दम-Did the northeastern states come into the mainstream after BJP came to powe

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BJP In Eastern States

Highlights

  • भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में बांस की खेती काफी बड़े पैमान पर होती है
  • पूर्वोत्तर राज्यों का दौरा 50 बार कर चुके हैं
  • शाह ने 102 क्षेत्रीय कार्यालयों की आधारशिला रखी

BJP In Eastern States: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आठ वर्ष के शासन के दौरान असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र शांति व विकास के पथ पर आगे बढ़े है। शाह ने असम की राजधानी गुवाहाटी में पार्टी के नवनिर्मित राज्य कार्यालय का उद्घाटन करने के बाद दावा किया कि आजादी के बाद से 1970 के कांग्रेस शासन ने पूर्वोत्तर क्षेत्र को हिंसा और अराजकता की ओर धकेल दिया था। 

मोदी के करीब हैं पूर्वोत्तर राज्य 

पिछले 8 वर्षों के दौरान मोदी के नेतृत्व ने इस क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ने में मदद की है। उन्होंने कहा कि “कांग्रेस शासन के दौरान न शांति थी, विकास हुआ और न ही इन राज्यों ने विकास किया और यहां तक कि क्षेत्र की संस्कृति को भी नुकसान हुआ था। लेकिन, 2014 से 2022 के बीच यह हमारा सौभाग्य है कि प्रधानमंत्री ने इस क्षेत्र को विकास की नयी ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। मोदी जी एक बड़े बरगद के पेड़ की तरह हैं, जिनकी छाया में यह क्षेत्र उनके द्वारा निर्धारित विकास लक्ष्यों को पूरा करने की राह पर है।”

हिंसा पर लगी रोक 
केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि अवैध घुसपैठियों के खिलाफ असम आंदोलन के दौरान वह एक छात्र कार्यकर्ता के रूप में कई बार यहां आए थे, और ‘कई बार कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्री हितेश्वर सैकिया के निर्देशों के तहत उन्हें बुरी तरह पीटा गया था’। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने 9,000 उग्रवादियों से हथियार डलवाकर असम में शांति स्थापित की है। भाजपा के वरिष्ठ नेता शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए बजट को तिगुना कर दिया है, जिससे सभी क्षेत्रों में ढांचागत विकास हुआ है। शाह ने कहा कि 2006-14 के दौरान राज्य में उग्रवादियों की संख्या 8,700 थी, जबकि हिंसा में 500 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। हालांकि, 2014 से 2022 के बीच उग्रवादियों की संख्या घटकर 250 रह गई और हिंसा के कारण 127 सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई है। 

आफ्स्पा को जल्द ही हटाया जाएगा 
उन्होंने आगे कहा कि ”राहुल बाबा (कांग्रेस नेता राहुल गांधी का जिक्र करते हुए) सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (आफ्स्पा) को पूरी तरह से हटाने की बात करते हैं, जो केवल बयानबाजी है, लेकिन भाजपा सरकार ने इस क्षेत्र में एक ऐसा माहौल बना दिया है जिसके कारण अधिनियम को इस क्षेत्र के 60 प्रतिशत से निरस्त कर दिया गया, जहां यह पहले लागू था।” शाह ने कहा कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए काम कर रहे हैं और वह दिन दूर नहीं जब इस कानून को पूरे क्षेत्र से हटा दिया जाएगा। 

2019 में भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष अमित शाह ने रखी थी नींव
शाह ने कहा कि राज्य के लिए कई परियोजनाएं हैं और सबसे महत्वपूर्ण राज्य में एक फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना है। गृह मंत्री ने कहा कि भाजपा राज्य में एक लाख युवाओं को रोजगार देने के लिए भी प्रतिबद्ध है। शाह ने पार्टी के नए कार्यालय का जिक्र करते हुए कहा, “भाजपा कार्यालय केवल ईंट-पत्थर की इमारत नहीं हैं, बल्कि यह पार्टी कार्यकर्ताओं के समर्पण, भावना, प्रतिबद्धता और कड़ी मेहनत को दर्शाती है।” शाह ने 2019 में भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष के रूप में पार्टी के भवन की आधारशिला रखी थी। 

मुख्यमंत्री और कार्यकर्ताओं ने आश्वासन दिया 
गृह मंत्री ने कहा, ”हालांकि मुझे संदेह था कि क्या यह महत्वाकांक्षी परियोजना संभव पाएगी। सरमा और अन्य कार्यकर्ताओं ने मुझे आश्वासन दिया था कि ऐसा होगा। आज मुझे पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा के साथ इसका उद्घाटन करते हुए बेहद गर्व महसूस हो रहा है।” उन्होंने कहा, ”मैं आज यहां केंद्रीय मंत्री के रूप में नहीं बल्कि पार्टी के एक कार्यकर्ता के रूप में आया हूं और मैं सभी से भाजपा के संस्थापकों के सिद्धांतों, प्रतिबद्धता और बलिदान के अनुसार काम करने का आग्रह करता हूं।” इससे पहले, शाह ने भाजपा अध्यक्ष जे.नड्डा के साथ केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा, पार्टी की राज्य इकाई के प्रमुख भावेश कलिता, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा और अन्य की उपस्थिति में पार्टी के नए मुख्यालय का उद्घाटन किया। नड्डा ने डिजिटल माध्यम से नौ जिला पार्टी कार्यालयों जबकि शाह ने 102 क्षेत्रीय कार्यालयों की आधारशिला रखी। 

पीएम की सीधी नजर पूर्वोत्तर के राज्यों पर
प्रधानमंत्री मोदी खुद पूर्वोत्तर राज्यों का दौरा 50 बार कर चुके हैं। आजादी के बाद ही ऐसा कोई प्रधानमंत्री है जिसने सबसे अधिक बार पूर्वोत्तर के राज्यों में गए हैं। बीजेपी के सत्ता में आने के बाद इन राज्यों में व्यापक बदलाव देखने को मिल हैं। वही पीएम मोदी ने पूर्वोत्तर के विकास पर विशेष रूप से ध्यान दिया है। इन राज्यों में बीजेपी ने परिवहन और संचार पर विशेष ध्यान दिया है।

इस कानून से पाई निजात 
भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में बांस की खेती काफी बड़े पैमान पर होती है। एक जमान में बांस को काटना कानून अपराध माना जाता था लेकिन मोदी सरकार ने इस कानून को खत्म कर दिया है। आपको बता दें कि भारतीय वन अधिनियम के तहत बांसो को काटना गैर कानूनी माना जाता था। अब वहां के लोगों को बांस काटने के लिए वन विभाग से अनुमति नहीं लेने की जरुरत है। पूरानी नियम होने के कारण किसानों को बांस की खेती करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। 

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