इतना भव्य नहीं होता गंगा विलास क्रूज़, अगर न लगा होता इस महिला का दिमाग, मिलिए डॉ. अन्नापूर्णा से

हाइलाइट्स

डॉ. अन्नपूर्णा गरीमला ने इस क्रूज़ का डिजाइन बनाया है.
इसके डिजाइन में करीब 5 साल का वक्त लगा है.
इसमें लगी कालीन से लेकर फर्नीचर तक सब कुछ स्वदेशी है.

Ganga Vilas Cruise : गंगा विलास क्रूज़ के बारे अब तक आपने जान ही लिया होगा. भारत में पहली बार कोई ऐसा क्रूज बनाया गया है, जिसे यूरोपीय देशों की टक्कर का माना जा रहा है. इस क्रूज की देश-विदेश में चर्चा हो रही है. यह क्रूज अगले 5 साल तक के लिए 60 से 70 फीसदी बुक हो चुका है. यदि आपको भी टिकट चाहिए तो लम्बा इंतजार करना पड़ सकता है. गंगा विलास क्रूज़ की चर्चा तो हर इंसान कर रहा है, लेकिन इस महान कृति के पीछे कौन खड़ा है, उसके बारे में ज्यादा चर्चा नहीं हुई है. जी हां, हम बात कर रहे हैं इसका डिजाइन तैयार करने वाली डॉ. अन्नपूर्णा गरीमला (Dr. Annapurna Garimella) के बारे में. आज हम आपको उनके बारे में कुछ ऐसी चीजें बताने जा रहे हैं, जो आपने अभी तक नहीं जानी होंगी.

क्रूज को ऑपरेट करने वाली कंपनी के मालिक राज सिंह के अनुसार, इसके डिजाइन में करीब 5 साल का वक्त लगा है. यह क्रूज पूरी तरह से मेड इन इंडिया है. इसे कोलकाता में तैयार किया गया है. वहीं इसकी खास बात यह है कि इसमें लगी कालीन से लेकर फर्नीचर तक हर चीज स्वदेशी है.

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देश-विदेश में हैं चर्चे
देश-विदेश में सुर्खियां बटोरने वाला यह भव्य रिवर क्रूज इन दिनों स्विट्जरलैंड के टूरिस्ट को लेकर वाराणसी से रवाना हो चुका है. यह बांग्लादेश के रास्ते असम के डिब्रूगढ़ तक करीब 3200 किलोमीटर की यात्रा 51 दिनों में पूरी करेगा. हम यहां इस भव्य रिवर क्रूज और इसे तैयार करने वाले लोगों के बारे में भी जानेंगे कि आखिर कौन हैं वे लोग जिनकी मेहनत ने आज सबको अपना दीवाना बनाया है.

जानिए, क्रूज डिजाइन करने वाली डॉ. गरीमला के बारे में
इसे डिजाइन करने वाली डॉ. अन्नपूर्णा गरीमला डिजाइनर और आर्ट हिस्टोरियन हैं. वह बेंगलूरु में रहती हैं. कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी से बीए करने के बाद उन्होंने न्यूयॉर्क की कोलंबिया यूनिवर्सिटी से एमफिल और पीएचडी की है. वह Jackfruit नाम का एक संगठन चलाती हैं. आपको बता दें कि डॉ. गरीमला कई किताबें भी लिखी हैं. उन्हें आजादी के बाद विकसित हुए भारत के देसी आर्ट और आर्किटेक्चर परंपराओं पर रिसर्च के लिए जाना जाता है.

क्रूज में है पूरी तरह भारतीय संस्कृति की झलक
इसके अलावा डॉ. अन्नपूर्णा ने अपना पूरा अनुभव इस क्रूज को बनाने में इस्तेमाल किया है. उन्होंने इसे पूरी तरह भारतीय संस्कृति और परंपरा को ध्यान में रखकर डिजाइन किया है. इसमें चमकीले और हल्के रंगों का इस्तेमाल किया गया है. इसकी कलाकृतियां में भी पूरी भारतीय संस्कृति की झलक है. कुशन से लेकर टाइल्स तक हर चीज हाथ से बनी हैं. इसके फर्नीचर, क्रॉकरी, कमरों के रंग और डिजाइन में आजादी के बाद के भारत की झलक देखने को मिल रही है.

Ganga vilas cruise

पर्यटकों को यह खूब भा रहा क्रूज
गंगा विलास क्रूज पर्यटकों को यह खूब भा रहा है. इस क्रूज की लंबाई साढ़े 62 मीटर और चौड़ाई 12.8 मीटर है. इसमें कुल 18 सुइट्स हैं. साथ में एक 40 सीटर रेस्टोरेंट, स्पा रूम और तीन सनडेक हैं. तीनों डेक पर अलग-अलग तरह की सुविधाएं दी गई हैं.

एक दिन का किराया 50 हजार रुपये
इस क्रूज को ऑपरेट करने वाली कंपनी अंतरा क्रूज प्राइवेट लिमिटेड के मालिक राज सिंह है. वे राजस्थान के भरतपुर के रहने वाले हैं. उनका कहना है कि इसके लिए बुकिंग तीन साल पहले ही शुरू हो गई थी. वहीं अगले पांच साल तक इसकी 60 से 70 फीसदी बुकिंग फुल है. बता दें कि इसका एक दिन का किराया 50 हजार रुपये है. पहली ट्रिप के लिए स्विस टूरिस्ट्स ने 38 लाख रुपये प्रति सुइट के हिसाब से बुकिंग कराई है. इसकी खासियत यह है कि यह क्रूज पूरी तरह से इको फ्रेंडली है. यानी इससे कोई प्रदूषण नहीं होगा. इसके अलावा, क्रूज में 60 हजार लीटर पानी स्टोर करने की क्षमता है. इसकी ईंधन क्षमता 40 हजार लीटर की है.

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