अलीगढ़ आए और ‘शिब्बोजी’ की कचौड़ी नहीं खाईं तो क्या खाया! 1951 से कायम है लाजवाब स्‍वाद

रिपोर्ट- वसीम अहमद

अलीगढ़. शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा जिसे करारी कचौड़ियों का स्वाद अपना दीवाना ना बना लेता हो. कचौड़ी की खुशबू आते ही चुंबक की तरह हर कोई इसकी तरफ खिंचा चला आता है. खासकर जब कोई अलीगढ़ में हो तब ये तलब और भी ज्यादा बढ़ जाती है. अगर आप यूपी के अलीगढ़ आए और हरिओम शर्मा शिब्बोजी की कचौड़ियों का स्वाद नहीं लिया तो खुद को ठगा महसूस करेंगे.

दरअसल खाई डोरा निवासी शिव नारायण शर्मा ने 1951 में कचौड़ी की दुकान की शुरुआत की थी. पिछले करीब 71 सालों से परिवार की चार पीढ़ियां इसे आगे बढ़ाते और चलाते चली आ रही हैं. मौजूदा वक्त में शिव नारायण शर्मा के पुत्र हरिओम शर्मा शिब्बोजी दुकान संभाल रहे हैं.

जानें कैसे पड़ा दुकान का नाम शिब्बोजी
वहीं, NEWS 18 LOCAL से बात करते हुए हरिओम शर्मा बताते हैं कि उनके पिताजी को प्यार से घर में शिब्बो कहा जाता था. वही नाम आज ब्रांड बन चुका है. दादा और पिता के बाद पुत्र हरिओम शर्मा ने 1982 से कमान संभाली थी. इसके बाद से आज तक स्वाद और साख गिरने नहीं दी. शिब्बोजी कचौड़ी एक ब्रांड बन गया है. जिसकी पहुंच सिर्फ देश नहीं बल्कि दुनिया भर में हैं. फिर चाहे अलीगढ़ के लोग हों, या फिर अमेरिका, इंग्लैंड, कनाडा, जापान और सिंगापुर के, उनकी कचौड़ी का स्वाद सभी को खींच ही लाता है. विदेश में रहने वाले लोग जब भी अलीगढ़ आते हैं, तो कचौड़ी खाए बिना नहीं रहते. वहीं, देश से लौटते समय कचौड़ी लेकर जाना भी नहीं भूलते हैं.

जानिए कैसे तैयार होती है पूरी-कचौड़ी?
शिब्बोजी कचौड़ी की खास बात इसकी शुद्धता है. शिब्बोजी कचौड़ी के मालिक हरिओम शर्मा शिब्बो बताते हैं कि कचौड़ी शुद्ध देसी घी में निकाली जाती है. जिसको लैब में टेस्ट कराकर इस्‍तेमाल में लिया जाता है. वहीं, सब्जी के लिए मसाले घर पर ही तैयार किए जाते हैं. इसके लिए खड़े मसाले को पहले खल्लर-मूसर में कूटा जाता है. फिर उसकी पिसाई होती है. मसाले में जरा भी मिलावट नहीं होती है, इसलिए सब्जी में जब मसाला मिलाया जाता है, तो वह लोगों को अपना दीवाना बना देती है.

यहां परोसा जाता है मीठा
हरिओम शर्मा शिब्बोजी कहते हैं कि दादाजी और पिताजी के समय से ही ग्राहकों का विशेष ध्यान रखा गया है. कचौड़ी और सब्जी खाने के बाद अक्सर लोगों का मन कुछ मीठा काने का करता है. यहां इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है. इसलिए ग्राहकों के लिए गर्मागर्म जलेबी तैयार रहती है. साथ ही साथ बेसन के लड्डू भी तैयार किए जाते हैं, ताकि ग्राहक चाहें तो तीखेपन को दूर कर सकें. जय शिव कचौड़ी भंडार अलीगढ़ की पुरानी कोतवाली के पास सराफा बाजार में है.

Tags: Aligarh news, Street Food

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